Dhamaal4Chutney : ‘फुलौरी बिना चटनी’? ‘धमाल 4’ के गाने का इतिहास
This song was first introduced to an international audience in 1969 by the famous singer Sundar Popo, in his own unique style.
Dhamaal4Chutney : ‘फुलौरी बिना चटनी’? ‘धमाल 4’ के गाने का इतिहास : – बॉलीवुड में कई बार ऐसे गाने लौटकर आते हैं, जिनकी धुन सुनते ही लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. कुछ गाने सिर्फ म्यूजिक नहीं होते, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक विरासत बन जाते हैं।
इन दिनों ऐसा ही एक गाना फिर चर्चा में है. ‘धमाल 4’ का नया गाना ‘चटनी’ रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया है और इसकी सबसे बड़ी वजह है इसका मशहूर हुक लाइन ‘फुलौरी बिना चटनी कैसे बनी’. लेकिन ये कोई नया गाना नहीं, बल्कि दशकों पुराने लोकगीत की विरासत है. जिसने बिहार से लेकर कैरेबियन देशों तक अपनी पहचान बनाई है।
‘फुलौरी बिना चटनी कैसे बनी’ मूल रूप से एक पॉपुलर भोजपुरी लोकगीत है. इसकी जड़ें बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक संस्कृति में मिलती हैं. ये गाना उन भोजपुरी भाषी लोगों के साथ विदेश भी पहुंचा, जिन्हें ब्रिटिश शासन के दौरान गिरमिटिया मजदूरों के रूप में कैरेबियन देशों में ले जाया गया था।
वहां इस गाने ने स्थानीय संगीत के साथ मिलकर एक नई शैली को जन्म दिया, जिसे आज ‘चटनी म्यूजिक’ कहा जाता है. जो अब बॉलीवुड की फिल्मों में भी नजर आ रहा है।
इस गाने को सबसे पहले इंटरनेशनल पहचान फेमस सिंगर सुंदर पोपो ने 1969 में अपने अंदाज में पेश किया था. उन्होंने भोजपुरी लोकधुन को कैरेबियन पॉप और लोक संगीत के साथ मिलाकर नया रूप दिया।
इसके बाद 1982 में बबला और कंचन ने इसे रीक्रिएट किया, जो काफी पॉपुलर हुआ. समय के साथ इस गाने के कई वर्जन सामने आए. साल 1994 में फिल्म ‘घर की इज्जत’ में इसकी धुन का इस्तेमाल किया गया. हालांकि, गाने के बोल अलग थे ।
भोजपुरी गायिका कल्पना पटोवारी ने भी इसे नए अंदाज में गाया, जो कि आरा हिले छपरा हिले’ एल्बम का हिस्सा था. फिर इस गाने को ‘आगरे का घाघरा’ एल्बम में भी सुना गया था।
बॉलीवुड में इस गाने की एंट्री साल 2012 में ‘दबंग 2’ फिल्म के जरिए हुई. फिल्म में ममता शर्मा और वाजिद अली की आवाज में इसका बॉलीवुड वर्जन सुनने को मिला, जिसने इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाया. अब 2026 में ‘धमाल 4’ ने इसी विरासत को फिर से बड़े पर्दे पर उतारा है।


