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RelationshipBalance : क्यों बिगड़ रहा है रिश्तों में संतुलन

Why is the balance in relationships deteriorating?

RelationshipBalance : क्यों बिगड़ रहा है रिश्तों में संतुलन :-  क्या सच में अब रिश्तों के फैसले इंसान नहीं, मशीनें तय कर रही हैं? हाल के समय में सामने आए कुछ मामलों ने इस सवाल को गंभीर बना दिया है. दुनिया भर में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं, जहां लोग सलाह ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहारा लेने के लिए भी चैटबॉट की ओर मुड़ रहे हैं और इसका असर उनके रिश्तों पर साफ दिखने लगा है।

बात करने का जरिया

एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई लोग अपने पार्टनर के साथ विवाद के दौरान चैटबॉट से सलाह लेते हैं और उसके जवाबों को अंतिम सच मानने लगते हैं.  कुछ मामलों में यह स्थिति इतनी आगे बढ़ जाती है कि रिश्ते टूटने तक की नौबत आ जाती है. एक्सपर्ट का मानना है कि यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि धीरे-धीरे हमारी जिंदगी में जगह बना रहा है।

पहले लोग अपनी समस्याएं परिवार या दोस्तों से साझा करते थे, लेकिन अब वही बातचीत एक निजी डिजिटल जगह में शिफ्ट हो गई है. खासकर उन लोगों के लिए, जो खुलकर अपनी बात कहने में हिचकते हैं, यह आसान विकल्प बनता जा रहा है।

भारत में भी इसका असर

Futurism की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि कई लोग विवाद के दौरान चैटबॉट के जवाबों को निष्पक्ष सलाह मानकर इस्तेमाल कर रहे हैं. वहीं The Week की रिपोर्ट के मुताबिक, चैटबॉट अब कई रिश्तों में एक “तीसरी आवाज” बनता जा रहा है, जो अक्सर सवाल पूछने के बजाय सहमति जताता है।

भारत में भी इसका असर दिखने लगा है, हालांकि यहां स्थिति अभी उतनी गंभीर नहीं है. तलाक से जुड़े मामलों को देखने वाली वंदना शाह बताती हैं कि लोग अक्सर कहते हैं कि “चैटबॉट के हिसाब से मेरा रिश्ता खत्म हो चुका है.” यह दिखाता है कि लोग अब अपनी निजी जिंदगी के फैसलों में भी तकनीक को शामिल करने लगे हैं।

क्यों बिगड़ रहा है रिश्तों में संतुलन

लेकिन असली समस्या यहीं से शुरू होती है. टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट साइरस जॉन का कहना है कि इस तरह के सिस्टम अक्सर यूजर की बात से सहमत होने की कोशिश करते हैं. यानी अगर कोई व्यक्ति अपने पार्टनर को गलत बताकर सलाह मांगता है, तो जवाब उसी दिशा में झुक सकता है।

यही वजह है कि रिश्तों में संतुलन बिगड़ सकता है. असल जिंदगी में हर कहानी के दो पहलू होते हैं, लेकिन मशीनें अक्सर वही दिखाती हैं जो आप सुनना चाहते हैं. इससे व्यक्ति अपने फैसलों में और ज्यादा पक्का हो जाता है, भले ही वह सही हो या गलत।

क्या कोई ऐसे मामले आए हैं

दिल्ली की काउंसलर बताते हैं कि अब कई लोग अपनी निजी समस्याएं पहले चैटबॉट से साझा करते हैं. उनके अनुसार, यह एक आसान तरीका जरूर है, लेकिन यह पूरी तस्वीर नहीं दिखाता. असल काउंसलिंग में जहां हर पहलू को समझा जाता है, वहीं यहां अक्सर अधूरी जानकारी पर ही राय बन जाती है।

हालांकि, कानूनी नजरिए से देखें तो अभी तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जहां किसी रिश्ते के टूटने की वजह सीधे तौर पर चैटबॉट को माना गया हो. लेकिन अगर किसी व्यक्ति का व्यवहार इस वजह से बदलता है कि जैसे दूरी बनाना या भावनात्मक नुकसान पहुंचाना, तो इसे मानसिक प्रताड़ना के रूप में देखा जा सकता है।

Leena Kumari

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