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BermudaTriangle : क्या है बरमूडा ट्रायंगल और कहाँ स्थित है? 

The Mysterious Disappearance of the USS Cyclops (1918)

  BermudaTriangle :  क्या है बरमूडा ट्रायंगल और कहाँ स्थित है?  :- सदियों से अटलांटिक महासागर का एक खास हिस्सा पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा रहस्य बना हुआ है. एक ऐसा इलाका जहाँ से गुजरने के बाद न तो बड़े-बड़े समुद्री जहाजों का पता चला और न ही आसमान में उड़ते विमानों का. न कोई मलबा मिला, न ही कोई लाश. हम बात कर रहे हैं ‘बरमूडा ट्रायंगल’ (Bermuda Triangle) की. पिछले 500 सालों में यहाँ 50 से ज्यादा जहाज और दर्जनों विमान रहस्यमयी तरीके से गायब हो चुके हैं।

हाल ही में अमेरिकी वैज्ञानिकों की एक नई खोज के बाद एक बार फिर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य हमेशा के लिए सुलझ गया है? वैज्ञानिकों को समुद्र के नीचे ऐसा क्या मिला है जो दुनिया में कहीं और नहीं है? आइए इस पूरी मिस्ट्री को आसान भाषा में समझते हैं।

क्या है बरमूडा ट्रायंगल और कहाँ स्थित है?

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि बरमूडा ट्रायंगल कोई आधिकारिक नाम नहीं है. उत्तरी अटलांटिक महासागर में तीन कोणों को मिलाकर एक काल्पनिक त्रिभुज बनता है. इसका पहला कोना अमेरिका का फ्लोरिडा तट है, दूसरा कोना ब्रिटेन का बरमूडा द्वीप है और तीसरा कोना प्यूर्टो रिको द्वीप है।

जब इन तीनों जगहों को आपस में जोड़ा जाता है, तो करीब 13 लाख वर्ग किलोमीटर का एक विशाल समुद्री क्षेत्र बनता है. इसी पूरे इलाके को दुनिया ‘बरमूडा ट्रायंगल’ या ‘डेविल्स ट्रायंगल’ (Devil’s Triangle) के नाम से जानती है. यह इलाका समुद्री व्यापार और हवाई रूट के लिहाज से बेहद व्यस्त माना जाता है।

कोलंबस की वो अजीब रात (1492)

दुनिया के मशहूर नाविक क्रिस्टोफर कोलंबस जब साल 1492 में अमेरिका की खोज में निकले थे, तब वे अपनी तीन नौकाओं के साथ इसी इलाके से गुजरे थे. उन्होंने अपने जहाज की लॉगबुक में लिखा था कि इस क्षेत्र में समुद्र के भीतर आग की लपटें दिखाई दी थीं. यही नहीं, उनके जहाज में लगा कंपास (दिशा सूचक यंत्र) भी अजीब हरकतें करने लगा था और उसकी रीडिंग पूरी तरह गलत आ रही थी।

पैट्रियट जहाज का गायब होना (1812)

इस इलाके से किसी बड़े जहाज के गायब होने की पहली पुख्ता घटना 31 दिसंबर 1812 को दर्ज हुई. ‘पैट्रियट’ नाम का एक अमेरिकी जहाज साउथ कैरोलिना से न्यूयॉर्क के लिए रवाना हुआ था. इस जहाज में अमेरिका के तत्कालीन उपराष्ट्रपति हारून बर्र की बेटी थियोडोसिया भी सवार थीं।

यह जहाज जैसे ही बरमूडा ट्रायंगल के क्षेत्र में पहुंचा, अचानक गायब हो गया. काफी खोजबीन के बाद भी इसका कुछ पता नहीं चला. इसके ठीक 3 साल बाद यानी 1815 में ‘USS एपेरवियर’ भी यहीं गायब हो गया, जिसमें 135 लोग सवार थे।

USS साइक्लोप्स की रहस्यमयी गुमशुदगी (1918)

मार्च 1918 में हुई एक घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया. अमेरिकी नौसेना का एक विशालकाय जहाज ‘USS साइक्लोप्स’ इस इलाके से गुजर रहा था. इस जहाज पर 10 हजार टन मैंगनीज लोड था और कुल 309 लोग सवार थे।

बिना किसी तूफान या आपातकालीन संदेश के यह जहाज अचानक गायब हो गया. आज 100 से ज्यादा साल बीत जाने के बाद भी अमेरिकी नौसेना को इस जहाज का एक तिनका तक नहीं मिला है।

फ्लाइट-19 का मशहूर हादसा (1945)

द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने के ठीक बाद, 5 दिसंबर 1945 को अमेरिकी नौसेना के 5 ‘TBM Avenger’ बॉम्बर विमानों ने एक रूटीन ट्रेनिंग के लिए उड़ान भरी. इसे ‘फ्लाइट-19’ कहा जाता है. इस उड़ान में एक अनुभवी कैप्टन और 13 ट्रेनी पायलट शामिल थे. उड़ान भरने के कुछ समय बाद पायलटों ने बेस स्टेशन को संदेश भेजा कि उनके कंपास काम नहीं कर रहे हैं और उन्हें दिशाओं का ज्ञान नहीं हो रहा है. इसके बाद सभी 5 विमान गायब हो गए. हैरान करने वाली बात यह रही कि इन विमानों को ढूंढने के लिए जो दो ‘मार्टिन मेरिनर’ खोजी विमान भेजे गए थे, वे भी कभी लौटकर वापस नहीं आए।

हाल के दिनों की कुछ घटनाएं

यह सिलसिला आधुनिक दौर में भी नहीं थमा. मई 1968 में अमेरिका की परमाणु पनडुब्बी ‘USS स्कॉर्पियन’ इसी इलाके में लापता हो गई. इसके बाद 15 अक्टूबर 1976 को 590 फीट लंबा एक कार्गो जहाज 37 क्रू मेंबर्स के साथ गायब हो गया।

साल 2003 में एक नवविवाहित जोड़ा अपनी छोटी नाव से फ्लोरिडा तट से निकला और कभी वापस नहीं आया. वहीं, 15 मई 2017 को 4 लोगों को ले जा रहा एक ‘Mitsubishi’ प्राइवेट विमान अचानक रडार से गायब हो गया, जिसका आज तक पता नहीं चला है।

जानकारों का कहना है कि कुछ न्यूज चैनलों और लेखकों ने इस जगह की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, जिससे यह एक खौफनाक रहस्य बन गया. असल में दुनिया में ऐसे कई समुद्री इलाके हैं, जो बरमूडा से कई गुना ज्यादा खतरनाक हैं।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण अर्जेंटीना का ‘ड्रेक पैसेज’ है. चिली और अंटार्कटिका के बीच स्थित इस समुद्री रास्ते पर अक्सर 40 फीट ऊंची लहरें उठती हैं. इतिहास में यहाँ अब तक लगभग 800 जहाज तबाह हो चुके हैं और 20 हजार से ज्यादा नाविकों की जान जा चुकी है।

साल 1819 में यहाँ स्पेन का एक प्रसिद्ध जहाज ‘सैन टेल्मो’ डूबा था, जिसमें एक साथ 644 लोगों की मौत हो गई थी. इसके बावजूद ड्रेक पैसेज को लेकर वैसी कहानियां नहीं बुनी गईं जैसी बरमूडा को लेकर बनाई गईं।

आस्ट्रेलिया के मशहूर वैज्ञानिक डॉ. कार्ल क्रुजेलनिकी का भी यही मानना है कि बरमूडा ट्रायंगल के हादसों के लिए एलियंस या किसी रहस्य को दोष देने के बजाय खराब मौसम और मानवीय भूलों को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. यह प्रकृति की ताकत और इंसानी कमियों का सीधा नतीजा है, न कि कोई जादुई रहस्य।

Leena Kumari

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