IASWife : IAS की पत्नी की जिंदगी का कड़वा सच, बड़े बंगले में अकेलेपन का दर्द
Being the wife of an IAS officer is very difficult.
IASWife : IAS की पत्नी की जिंदगी का कड़वा सच, बड़े बंगले में अकेलेपन का दर्द :- एक आईएएस अफसर की पत्नी की जिंदगी बाहर से जितनी रसूखदार दिखती है, भीतर से उतनी ही अकेलेपन और संघर्ष से भरी होती है. देश सेवा में व्यस्त पति की अनुपस्थिति के कारण घर-परिवार, बच्चों की परवरिश और त्योहारों की पूरी जिम्मेदारी पत्नी को अकेले ही उठानी पड़ती है. हाल ही में सोशल मीडिया इन्फ्ल्यूएंसर और एक IAS की पत्नी चंद्रिका (@hello_chandrikaa) ने एक वीडियो रील के जरिए इस बंगले के सन्नाटे और सुविधाओं के पीछे छिपे बड़े त्याग को बयां किया है. यह कहानी उसी अनसुने अकेलेपन और समझौते की है।
IAS की पत्नी होना बहुत मुश्किल है
चंद्रिका बताती है, “अक्सर लोग कहते हैं कि आईएएस की बीवी है, तो मजे ही मजे होंगे. चलिए, आज इस बात पर हम और आप मिलकर थोड़ा हंस लेते हैं. उन्होंने बताया कि गणपति और लक्ष्मी पूजा के समय जब पूरा परिवार साथ होता है, मिलकर खाता-पीता है और घर में एक अलग ही रौनक होती है. लेकिन उनके पति इस वक्त नासिक से बाहर ड्यूटी पर थे. घर की सजावट से लेकर पूजा की सारी तैयारियां मुझे अकेले ही करनी थी।
उन्होंने बताया, “लोग तो बड़ी आसानी से कह देते हैं कि आईएएस की पत्नी है, बड़ी सुविधा संपन्न होगी. हां भाई, मैं मना नहीं करती. सुविधाएं हैं. लेकिन लोग जितनी आसानी से हमारे ठाठ-बाठ गिन लेते हैं, हमारे त्याग को कौन गिनेगा? जब लोग मेरे बड़े से बंगले को देखते हैं, तो कहते हैं ‘वाह मैम, कितना बड़ा घर है.’ पर उस बड़े घर का सन्नाटा और अकेलापन सिर्फ मैं जानती हूं।
जब आपके घरों में त्योहार पर सब मिलकर खाना खाते हैं, तब मेरे यहां पति के हिस्से की थाली अलग निकालकर ढक दी जाती है, क्योंकि साहब के आने का कोई वक्त तय नहीं होता. त्योहारों की खरीदारी मुझे सब अकेले ही करना पड़ता है. जब वह शाम ढले थककर घर लौटते हैं, तब तक तस्वीरें खींचने वाली अच्छी रोशनी भी जा चुकी होती है।
तमाम अकेलेपन के बाद भी हमें चेहरे पर मुस्कान रखनी पड़ती है ताकि घर का माहौल फीका न पड़े. आपके पास दुनिया की हर चीज हो सकती है, लेकिन त्योहार के दिन जब वह एक खास इंसान आपके साथ नहीं होता, तो हर रंग अधूरा लगने लगता है. मुश्किल तो बहुत है, पर हम आईएएस की पत्नियां हर मुश्किल को मुस्कुराकर झेलना सीख जाती हैं. लोग यह तो तुरंत देख लेते हैं कि हमारे पास क्या है, पर कोई यह नहीं देखता कि हमने इसके लिए क्या-क्या पीछे छोड़ दिया है।



