BadrinathDham : ‘स्मार्ट’ आदर्श यात्रा व्यवस्था लागू करेंगे – एडीजी ए.पी. अंशुमान
The ADG took to the field directly and began reviewing the preparations for the journey.
BadrinathDham : ‘स्मार्ट’ आदर्श यात्रा व्यवस्था लागू करेंगे :- उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलने जा रहे हैं। इस आध्यात्मिक महापर्व की उलटी गिनती शुरू होते ही शासन-प्रशासन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
इसी कड़ी में, बदरीनाथ धाम यात्रा के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी और अपर पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) ए.पी. अंशुमान (IPS) ने चमोली के प्रवेश द्वार गौचर पहुंचकर व्यवस्थाओं की कमान अपने हाथों में ले ली। जनपद के पुलिस कप्तान सुरजीत सिंह पँवार ने यात्रा के लिए अब तक किए गए होमवर्क की संक्षिप्त जानकारी साझा की।
एडीजी ने सीधे मोर्चे पर उतरकर यात्रा तैयारियों की समीक्षा शुरू की। एक उच्चस्तरीय बैठक में बीआरओ, आईटीबीपी, नगर पालिका, व्यापार संघ,जनप्रतिनिधियों जिला प्रशासन,पीडब्लूडी, रेलवे और एनएच (NH) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गहन विचार-विमर्श किया।
बैठक के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि गौचर से ऊपर का यात्रा मार्ग नदी किनारे से होकर गुजरता है, जहां दुर्घटना की स्थिति में वाहन सीधे अलकनंदा नदी में गिरने का खतरा बना रहता है।
साथ ही यह भी बताया गया कि मैदानी क्षेत्रों से फ्लड टीम या गोताखोरों के पहुंचने में विलंब होने के कारण रेस्क्यू कार्य प्रभावित होता है। इस पर एडीजी यात्रा अवधि के दौरान संवेदनशील स्थानों पर जल पुलिस की विशेष यूनिट तैनात करने तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध गोताखोरों की सेवाएं लेने के सुझाव पर सहमति व्यक्त की।
स्थानीय व्यापारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने बताया कि चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण गैस सिलेंडरों की मांग बढ़ जाती है, जबकि वर्तमान में मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो पा रही है।
उन्होंने सुझाव दिया कि पूर्व की भांति नियमित एवं पर्याप्त आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखा जाए, ताकि किसी प्रकार की असुविधा उत्पन्न न हो।इस संबंध में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि आपूर्ति में बाधा की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में केरोसीन (मिट्टी का तेल) की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाए।
बैठक के दौरान स्थानीय व्यापारियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि बिना रजिस्ट्रेशन आए यात्रियों को जनपद की सीमा से वापस लौटाने की व्यवस्था के कारण स्थानीय व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि पूर्व की भांति ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था पर भी पुनः विचार किया जाए, जिससे यात्रियों को सुविधा मिल सके तथा स्थानीय व्यापार भी प्रभावित न हो।
एडीजी ने सभी सुझावों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्यवाही एवं समन्वय स्थापित कर प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए साथ ही स्थानीय लोगों को आश्वस्त किया “स्थानीय जनप्रतिनिधियों और व्यापारियों के ये सुझाव यात्रा को सफल बनाने के लिए मील का पत्थर साबित होंगे। हम तकनीक और स्थानीय अनुभव को जोड़कर एक आदर्श यात्रा व्यवस्था लागू करेंगे।”



