उत्तराखंड
Trending

ParashuramaAlive : क्या आज भी जिंदा हैं भगवान परशुराम ?

Evidence of Immortality in the Scriptures.

ParashuramaAlive :क्या आज भी जिंदा हैं भगवान परशुराम ? :-  हमारे शास्त्रों के अनुसार, भगवान परशुराम को ‘अष्टचिरंजीवी’ में से एक माना गया है, जिसका अर्थ है कि वे उन आठ दिव्य आत्माओं में शामिल हैं जो कलयुग के अंत तक इस पृथ्वी पर जीवित रहेंगे. वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि, जिसे अक्षय तृतीया कहा जाता है, को भगवान परशुराम का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 19 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा. पौराणिक कथाओं के अनुसार, परशुराम जी भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं और उनका जन्म संसार से अधर्म का विनाश करने के लिए हुआ था. वे अपनी कठोर तपस्या और अजेय शक्ति के लिए जाने जाते हैं।

शास्त्रों में अमरता का प्रमाण

विभिन्न पुराणों और धार्मिक ग्रंथों में भगवान परशुराम के आज भी जीवित होने के स्पष्ट उल्लेख मिलते हैं. ‘श्रीमद्भागवत पुराण’ और ‘कल्कि पुराण’ के अनुसार, परशुराम जी महेंद्र पर्वत पर निवास करते हैं और वहां रहकर गहन तपस्या में लीन हैं. वे न केवल प्राचीन युगों के साक्षी हैं, बल्कि आने वाले समय के लिए भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

शास्त्रों में बताया गया है कि वे कलयुग के अंत में होने वाले भगवान ‘कल्कि’ के गुरु बनेंगे और उन्हें अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा देंगे. उनकी यह उपस्थिति समय के चक्र और धर्म की निरंतरता का प्रतीक मानी जाती है।

महेंद्र पर्वत और तपस्या का स्थान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने अपना सारा राज्य और संपत्ति दान करने के बाद तपस्या के लिए महेंद्र पर्वत को अपना निवास स्थान बनाया था. उड़ीसा के गजपति जिले में स्थित महेंद्रगिरि पर्वत को आज भी उनकी तपस्थली माना जाता है।

भक्तों का ऐसा विश्वास है कि आज भी वे सूक्ष्म रूप में वहां विद्यमान हैं. वे एक ऐसे योद्धा ऋषि हैं जिन्होंने शस्त्र और शास्त्र दोनों का संचालन समान कुशलता से किया. उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि शक्ति का उपयोग हमेशा धर्म की रक्षा और समाज के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।

परशुराम जन्मोत्सव पर क्या करें?

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: इस दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. यह आपके मन को शांत करता है और शरीर में नई ऊर्जा भरता है।

पूजन और व्रत: भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और चंदन, अक्षत व पुष्प अर्पित करें. इस दिन व्रत रखने से संकल्प शक्ति बढ़ती है।

शस्त्र और शास्त्र का सम्मान: परशुराम जी ज्ञान और शक्ति के प्रतीक हैं, इसलिए इस दिन अपनी पुस्तकों या कार्यक्षेत्र के औजारों की सफाई कर उनका सम्मान करना चाहिए।

Leena Kumari

InsideNewsPostUK is a digital news portal dedicated to delivering timely, accurate, and insightful coverage of current events across the world. From politics and business to entertainment, technology, and lifestyle, we aim to inform and engage readers with in-depth reporting, expert analysis, and diverse perspectives. With a commitment to journalistic integrity and digital innovation, InsideNewsPostUK strives to be a trusted source for breaking news and thoughtful commentary in a rapidly changing media landscape.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button