FarmersProtest : कुएं में खटिया, दिमाग में बत्तियां! कर्ज के बोझ से दबे किसानों ने सरकार को हिलाने के लिए निकाला ये अतरंगी जुगाड़
The demands of the protesters are extremely ‘serious’.
FarmersProtest : कुएं में खटिया, दिमाग में बत्तियां! कर्ज के बोझ से दबे किसानों ने सरकार को हिलाने के लिए निकाला ये अतरंगी जुगाड़ :- शोले फिल्म के ‘वीरू’ का पानी की टंकी पर चढ़ना तो सबको याद होगा, लेकिन महाराष्ट्र के जालना में दो किसानों ने विरोध का जो तरीका निकाला, उसने सबको हैरान कर दिया है. सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए ये किसान किसी दफ्तर के बाहर नहीं, बल्कि सीधे गहरे कुएं के अंदर चारपाई (खाट) बिछाकर बैठ गए।
महाराष्ट्र के जालना जिले में बिना शर्त संपूर्ण कर्जमाफी और फसल बीमा की मांग को लेकर दो किसानों ने गहरे कुएं के अंदर चारपाई (खाट) लटकाकर उस पर बैठने का एक बेहद अनोखा और अजब-गजब आंदोलन किया।
इस हैरतअंगेज प्रदर्शन को देखने के लिए मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई और पूरे इलाके में इसकी चर्चा तेज हो गई. आखिरकार, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किसानों की मांगों का ज्ञापन स्वीकार किए जाने के बाद ही यह ‘कुआं छोड़ो’ आंदोलन समाप्त हुआ।
अजब-गजब आंदोलन
कुएं के अंदर हवा में झूलती चारपाई पर बैठे किसानों का यह नजारा जिसने भी देखा, वह दंग रह गया. देखते ही देखते इस अनोखे स्टंट वाले आंदोलन को देखने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई. किसानों का कहना था कि सरकार की नीतियां उन्हें गहरे गर्त में धकेल रही हैं, इसलिए वे कुएं में बैठकर अपना हक मांग रहे हैं।
आंदोलनकारियों की मांग बेहद ‘गंभीर
इन ‘अजब’ आंदोलनकारियों की मांग बेहद ‘गंभीर’ है. किसानों की मुख्य मांग है कि राज्य के सभी किसानों का पूरा कर्ज बिना किसी शर्त के माफ किया जाए और उनके सातबारा (भूमि रिकॉर्ड) को पूरी तरह कोरा यानी कर्जमुक्त किया जाए. किसानों का आरोप है कि सरकार की 2 लाख रुपये की कर्जमाफी योजना में इतने नियम और शर्तें हैं कि आम किसान इसका लाभ ही नहीं ले पा रहे हैं।
किसानों ने दी चेतावनी
इसके अलावा, किसानों ने फसल बीमा की राशि तुरंत जारी करने, फसलों का सही समर्थन मूल्य देने और खाद के लिए शुरू की गई ऑनलाइन व्यवस्था को बंद कर पुरानी ऑफलाइन व्यवस्था बहाल करने की मांग की है।
मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों को जब किसानों ने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा, तब जाकर यह ‘कुआं छोड़ो’ आंदोलन समाप्त हुआ. हालांकि, किसानों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने पर वे इससे भी बड़ा धमाका करेंगे।



