GratuityNewRules : अब सिर्फ एक साल की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी
Fixed-term employees are those whom companies engage on a written contract for a specific duration, such as one or two years.
GratuityNewRules : अब सिर्फ एक साल की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी :- देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट और नौकरी बदलने से जुड़े नियमों में एक बड़ा और राहत भरा बदलाव हुआ है। 21 नवंबर 2025 से लागू हुए नए लेबर कोड ने दशकों पुराने उस नियम की दीवार को ढहा दिया है, जिसमें ग्रेच्युटी के हकदार बनने के लिए एक ही कंपनी में लगातार 5 साल तक काम करना अनिवार्य होता था।
इस नए बदलाव ने उन लाखों युवाओं और प्रोफेशनल्स के लिए रास्ते खोल दिए हैं जो अक्सर प्रोजेक्ट्स के आधार पर अपनी नौकरियां बदलते हैं, हालांकि इस नियम की बारीकियों को लेकर अब भी कर्मचारियों के बीच काफी चर्चा और उलझन बनी हुई है। नए लेबर कोड की सबसे बड़ी खुशखबरी ‘फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉइज’ (FTE) के लिए आई है, जिन्हें अब ग्रेच्युटी के लिए सालों का लंबा इंतजार नहीं करना होगा।
दरअसल, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी वे होते हैं जिन्हें कंपनियां एक तय समय, जैसे एक या दो साल के लिखित कॉन्ट्रैक्ट पर अपने साथ जोड़ती हैं। अब सरकार ने यह साफ कर दिया है कि अगर किसी कर्मचारी की नियुक्ति फिक्स्ड-टर्म के तहत हुई है, तो वह केवल एक साल की निरंतर सेवा पूरी करने के बाद ही ग्रेच्युटी पाने का कानूनी हकदार बन जाएगा।
इसका सीधा मतलब यह है कि अब कंपनियों के सीधे पेरोल पर होने के कारण इन कर्मचारियों को भी स्थायी स्टाफ की तरह सैलरी, छुट्टियां और अन्य भत्ते मिलेंगे।
यह नई व्यवस्था खास तौर पर उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी जो प्रोजेक्ट-बेस्ड काम का हिस्सा बनते हैं। अगर आपका कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट 1 साल 3 महीने का है, तो कंपनी आपको पूरे 15 महीनों की ग्रेच्युटी का भुगतान करेगी।
नियम बिल्कुल स्पष्ट है कि एक साल की न्यूनतम सीमा पूरी करने के बाद आप जितने भी दिन या महीने अतिरिक्त काम करेंगे, कंपनी को उतने समय की ग्रेच्युटी जोड़कर देनी होगी। उदाहरण के तौर पर, यदि आपने 1 साल 5 महीने नौकरी की है, तो आपकी ग्रेच्युटी की गणना पूरे 17 महीनों के आधार पर की जाएगी, हालांकि एक साल से कम की अवधि पर यह लाभ नहीं मिलेगा।
वहीं, स्थायी या परमानेंट कर्मचारियों की बात करें तो उनके लिए अभी भी पुरानी 5 साल की सेवा की शर्त लागू है, जिसमें केवल मृत्यु या दिव्यांगता जैसी दुखद परिस्थितियों में ही छूट का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, नए लेबर कोड ने ग्रेच्युटी की गणना के तरीके को भी बदलकर आपकी जेब पर सीधा असर डाला है।
अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसके कुल सीटीसी का कम से कम 50 फीसदी होनी अनिवार्य है। इसका मतलब यह है कि कंपनी आपके हाउस रेंट (HRA) या ट्रैवल अलाउंस जैसे भत्तों को 50 फीसदी से ज्यादा नहीं दिखा सकती। अगर ये भत्ते सीमा से बाहर जाते हैं, तो अतिरिक्त राशि आपकी बेसिक सैलरी में जोड़ दी जाएगी, जिससे न केवल आपकी ग्रेच्युटी की रकम बढ़ेगी बल्कि आपके पीएफ (PF) फंड में भी इजाफा होगा।



