उत्तराखंड
Trending

UttarakhandWaqfBoard : नए निकाहनामे का मसौदा लेकर वक़्फ़ बोर्ड तैयार

Shams stated that a proposal to draft a new *Nikah-nama* (marriage contract) in accordance with the UCC law was made during a meeting of the State Waqf Board four months ago.

UttarakhandWaqfBoard : नए निकाहनामे का मसौदा लेकर वक़्फ़ बोर्ड तैयार :-  समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने के बाद अब उसके प्रावधानों के अनुरूप उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने प्रदेश में एक नए निकाहनामे का मसौदा तैयार किया है जिसके तहत केवल पंजीकृत काजी या मौलाना ही निकाह पढ़वा सकेंगे और इससे सिर्फ शादी के लिए धर्मांतरण के मामलों पर भी रोक लग सकेगी।

राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया कि नए निकाहनामे का मसौदा लगभग तैयार हो चुका है जिस पर चर्चा के लिए 9 सितंबर को एक बैठक बुलाई गयी है। इस बैठक में वक्फ बोर्ड के सदस्यों के अलावा प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते एवं यूसीसी मसौदा समिति के तीन सदस्य शामिल होंगे।

उन्होंने बताया कि इस मसौदे पर उलेमाओं (मुसलमान धर्मगुरूओं) की सहमति भी ली जाएगी। उन्होंने बताया कि सभी स्तरों पर विचार-विमर्श करने और कानूनी तौर पर जांच परख करने के बाद इसे जारी किया जाएगा ताकि इसके क्रियान्वयन में कोई चुनौती न आए।

शम्स ने कहा कि राज्य वक्फ बोर्ड की चार माह पहले हुई बैठक में यूसीसी कानून के हिसाब से नया निकाहनामा तैयार करने का प्रस्ताव पारित किया गया था।

राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा, ”इसके दो फायदे होंगे, एक— निकाह पढ़ाने वाले काजी की आईडी पता होगी, और दूसरा— किसी हिंदू, सिख या अन्य धर्म की लड़की या लड़के का धर्मांतरण कर उसका नाम बदलकर निकाह करवाने के कथित ‘लव जिहाद’ के मामलों पर भी अंकुश लगेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि इससे न केवल अदालत में जाने वाले मामले कम होंगे बल्कि सामाजिक सौहार्द भी बना रहेगा।

वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने बताया कि नए निकाहनामा के माध्यम से महिलाओं को हलाला जैसी कुप्रथा के बारे में जागरूक किया जाएगा कि यह प्रथा इस्लाम में नहीं है और अगर कोई उन्हें इसके लिए मजबूर करता है तो वे वक्फ बोर्ड और सरकारी संस्थाओं से मदद ले सकती हैं। शम्स ने बताया कि इसी प्रकार शौहर की मौत के बाद उसकी विधवा को चार माह 10 दिन तक एकांत में परदे में बिताने की इद्दत प्रथा से भी मुक्त किया गया है।

शम्स ने कहा कि नए निकाहनामे में शादी करने वाले लड़के और लड़की के अलावा उनकी वकालत करने वाले और गवाहों के तौर पर पेश होने वाले लोगों के आधार कार्ड भी अनिवार्य होंगे।

उन्होंने कहा कि नए निकाहनामे में सबकी जिम्मेदारी तय करने का प्रयास किया गया है जिससे कहीं किसी के साथ ज्यादती न हो पाए। उन्होंने कहा कि अगर शादी करने वालों में से एक दूसरे धर्म का है तो उस पर धर्मांतरण का दवाब डाले बिना विशेष विवाह अधिनियम के तहत उससे शादी की जा सकती है।

इसके अलावा, शम्स ने बताया कि यूसीसी कानून के अनुरूप नए निकाहनामे में दूसरी, तीसरी और चौथी शादी का कॉलम हटा दिया जाएगा और केवल एक शादी का कॉलम रखा जाएगा ।

इसके अलावा, उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में तलाक़-ए-बिद्दत या (एक बार में) तीन तलाक पर प्रतिबंध और उस पर सजा के प्रावधान को देखते हुए नए निकाहनामे में केवल तलाक़-ए-अहसन और तलाक-ए-हसन का प्रावधान रहेगा जिसमें शादी बचाने के लिए कम से कम तीन माह तक सुलह के प्रयास किए जाते हैं।

हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर कोई महिला इसे अपनी मर्जी से इद्दत में रहना चाहती है तो उसे इसकी छूट रहेगी। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष ने कहा, ”यह एक बड़ा सुधार है और इसके लागू होने से मुस्लिम समाज में बहुत बड़ा बदलाव आएगा। यूसीसी को भी सही मायनों में धरातल पर इसी के माध्यम से उतारा जा सकता है।

प्रदेश में 25 जनवरी 2025 को यूसीसी लागू हुआ था। उन्होंने बताया कि वक्फ बोर्ड के अधीन आने वाली मस्जिदों, मदरसों तथा अन्य मजहबी संस्थाओं की प्रबंधन समितियों के माध्यम से निकाह पढ़ाने वाले मौलानाओं को एक विशेष पहचान संख्या (यूआईडी नंबर) दी जाएगी और केवल वे ही निकाह करवाने के लिए अधिकृत होंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजीकृत काजी या मौलाना की जिम्मेदारी केवल प्रस्तावित निकाहनामे के तहत निकाह करवाने की होगी और इसके लिए वे धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकेंगे।

Leena Kumari

InsideNewsPostUK is a digital news portal dedicated to delivering timely, accurate, and insightful coverage of current events across the world. From politics and business to entertainment, technology, and lifestyle, we aim to inform and engage readers with in-depth reporting, expert analysis, and diverse perspectives. With a commitment to journalistic integrity and digital innovation, InsideNewsPostUK strives to be a trusted source for breaking news and thoughtful commentary in a rapidly changing media landscape.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button