उत्तराखंड
Trending

CongressBhitarghatAlert : कांग्रेसियों में घमासान – टिकट वितरण नहीं होगा आसान

Taking the gravity of the situation into account, the person in charge, Kumari Selja, has adopted a tough stance and issued clear instructions.

CongressBhitarghatAlert : कांग्रेसियों में घमासान – टिकट वितरण नहीं होगा आसान :-  उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर  एक तरफ जहां सत्ताधारी भाजपा अपनी बिसात बिछाने की रफ़्तार बढ़ा रही है उद्घाटन , शिलान्यास और घोषणाएं की जा रही हैं , वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के भीतर का ‘अंतरकलह ’ चुनावी ताप के बीच सुलगता नजर आ रहा है।

कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और राज्य प्रभारी कुमारी शैलजा संगठन को पटरी पर लाने और चुनावी तैयारियों को दुरुस्त करने के लिए लगातार उत्तराखंड के दौरे कर रही हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत यह है कि हाईकमान की तमाम कोशिशों और कड़े निर्देशों के बावजूद पार्टी के भीतर गुटबाजी और आपसी खींचतान कम होने के बजाय और गहरी होती जा रही है। चुनावी साल में कांग्रेस के लिए नेताओं की यह अंदरूनी कलह चुनावी खेल और नतीजे बिगाड़ भी सकती है।

पार्टी के सामने सबसे गंभीर और व्यावहारिक संकट यह है कि सांगठनिक बदलावों और नई नियुक्तियों को लेकर आपसी सहमति नहीं बन पा रही है। जिला और महानगर स्तर पर मजबूत टीम खड़ी करने की कोशिशें तो हो रही हैं, लेकिन अलग-अलग गुटों के दबाव और अपने करीबियों को पद दिलाने की होड़ के कारण इस पूरी प्रक्रिया पर ब्रेक लगा हुआ है।

हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी कुमारी शैलजा ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ हिदायत दी है कि जो भी पदाधिकारी आगामी चुनाव लड़ना चाहते हैं, वे संगठन के पदों को छोड़ दें ताकि नए चेहरों को मौका मिले।

सांगठनिक फैसलों में आ रही इस रुकावट और नेताओं के अड़ियल रवैये को लेकर प्रभारी ने केंद्रीय नेतृत्व और राहुल गांधी को भी राज्य के मौजूदा हालात से अवगत कराया है, जिससे साफ है कि यह रार अब दिल्ली दरबार की चौखट तक पहुंच चुकी है।

उत्तराखंड कांग्रेस में क्षत्रपों की आपसी जंग का इतिहास पुराना है, लेकिन इस बार यह लड़ाई सीधे तौर पर पार्टी की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक पदाधिकारियों की एकजुट टीम समय पर तैयार नहीं होती है, तो इसका सबसे घातक असर टिकट आवंटन के दौरान दिखेगा।

वर्तमान में जो नेता अंदरूनी रूप से एक-दूसरे की जड़ें काटने और अपना वर्चस्व स्थापित करने में जुटे हैं, वे टिकट बंटवारे के वक्त खुलकर आमने-सामने आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में पार्टी के भीतर बड़े पैमाने पर बगावत और अंतर्घात (भीतरघात) का खतरा पैदा हो सकता है, जो कांग्रेस के बने-बनाए खेल को बिगाड़ देगा।

किसी भी चुनाव को जीतने के लिए एक मजबूत और एकजुट सांगठनिक ढांचे की जरूरत होती है। जब तक निचले स्तर पर काम करने वाली कोर टीम ही तय नहीं होगी, तब तक बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और सत्ता विरोधी माहौल को वोटों में तब्दील करना लगभग नामुमकिन होगा।

कुमारी शैलजा की बार-बार की नसीहतों का असर नेताओं के बयानों में तो ‘अखिल भारतीय एकजुटता’ के रूप में दिखता है, लेकिन धरातल पर कार्यकर्ताओं का मनोबल नेताओं की आपसी रंजिश की भेंट चढ़ रहा है।

यदि कांग्रेस ने समय रहते इस अंदरूनी कलह को काबू में नहीं किया, तो अनुकूल माहौल होने के बावजूद उसे आगामी विधानसभा चुनाव की दहलीज पर भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। यह लेख सोशल मीडिया से साभार लगा है।

Leena Kumari

InsideNewsPostUK is a digital news portal dedicated to delivering timely, accurate, and insightful coverage of current events across the world. From politics and business to entertainment, technology, and lifestyle, we aim to inform and engage readers with in-depth reporting, expert analysis, and diverse perspectives. With a commitment to journalistic integrity and digital innovation, InsideNewsPostUK strives to be a trusted source for breaking news and thoughtful commentary in a rapidly changing media landscape.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button