BhairavPujaVidhi : भगवान शिव के पांचवे अवतार हैं बटुक भैरव, जानें कालाष्टमी पर उनकी पूजा का महत्व
According to Hindu belief, Kalashtami and Sundays are considered extremely auspicious days for the worship of Lord Batuk Bhairav.
BhairavPujaVidhi : भगवान शिव के पांचवे अवतार हैं बटुक भैरव, जानें कालाष्टमी पर उनकी पूजा का महत्व :- सनातन परंपरा में बटुक भैरव को देवों के देव महादेव का सौम्य बाल स्वरूप माना जाता है. भगवान शिव के अवतार बटुक भैरव की पूजा के लिए कालाष्टमी का पर्व सबसे उत्तम माना गया है. पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष में पड़ने वाली जिस अष्टमी तिथि पर कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है, वह मई महीने में 9 तारीख को पड़ेगा. कालाष्टमी के दिन भगवान बटुक भैरव की पूजा किस प्रकार की जाती है और इसका क्या धार्मिक महत्व है, आइए इसे विस्तार से जानते हैं।
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान बटुक भैरव की पूजा के लिए कालाष्टमी और रविवार का दिन अत्यंत ही शुभ और फलदायी माना गया है. बटुक भैरव की पूजा के लिए प्रात:काल या फिर रात्रि को 10 बजे के बाद का समय सबसे ज्यादा शुभ माना गया है. बटुक भैरव की रात्रि साधना शीघ्र ही फलदायी मानी गई हैं।
साधक को बटुक भैरव की पूजा उनके मंदिर में जाकर या फिर अपने घर के ईशान कोण में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर करनी चाहिए. भगवान भैरव के चित्र को एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर रखें. इसके बाद उस पर गंगाजल छिड़कें और पुष्प, चंदन, धूप, दीप, फल, मिष्ठान, काली उड़द की दाल, वस्त्र आदि अर्पित करें।
भगवान भैरव को प्रसन्न करने के लिए इस दिन मीठी रोटी या रोट का भोग लगाया जाता है. इसके साथ आप उन्हें खीर, आटे व मेवे से बने लड्डू, आटे और गुड़ से बने पुए, गुड़ और चना आदि भी अर्पित कर सकते हैं।
भगवान भैरव की पूजा में उनके मंत्र “ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं” का अधिक से अधिक जप करें. बटुक भैरव के मंत्र का जाप आप अपनी आस्था के अनुसार 21, 51 या फिर 100 माला कर सकते हैं. भगवान बटुक भैरव के मंत्र को हमेशा रुद्राक्ष की माला से जाप करें।
हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान बटुक भैरव का प्राकट्य आपद् नामक राक्षस के अंत के लिए हुआ था. पौराणिक कथा के अनुसार एक बार आपद् नाम के राक्षस ने तप करके ब्रह्माजी को प्रसन्न करके उनसे यह वरदान प्राप्त कर लिया कि उसका वध सिर्फ 5 साल के बालक द्वारा ही संभव हो सकती है. यह वरदान पाने के बाद आपद् राक्षस ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया. इसके बाद देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव के तीसरे नेत्र से उनके सौम्य अवतार बटुक भैरव का प्राकट्य हुआ, जिन्हें बटुक भैरव कहा गया।
भगवान बटुक भैरव ने आपद् नाम राक्षस को मारकर देवताओं को अभय प्रदान किया. भगवान बटुक भैरव का प्रसिद्ध मंदिर वाराणसी में स्थित है. भगवान शिव के सौम्य स्वरूप बटुक भैरव की पूजा से मिलने वाले पुण्यफल से व्यक्ति अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है. भगवान बटुक भैरव की पूजा एवं व्रत करने से व्यक्ति के सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है और उसे जीवन में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहती है।



