15yearsoldvehiclerules : 15 साल पुराने निजी वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन के लिए नया नियम लागू
RTO Administrator Sandeep Saini has issued orders in this regard, in accordance with the directives of the Central Government.
15yearsoldvehiclerules ; 15 साल पुराने निजी वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन के लिए नया नियम लागू :- देहरादून में 15 साल पुराने निजी वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन के लिए अब ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर (एटीएस) में यह जांच अनिवार्य कर दी गई है। यह नई व्यवस्था केंद्र सरकार के निर्देशों पर लागू की गई है।
15 वर्ष पूरे कर चुके निजी वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन को लेकर परिवहन विभाग ने नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब ऐसे वाहनों का पंजीकरण नवीनीकरण (री-रजिस्ट्रेशन) तभी संभव होगा, जब वाहन आटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर (एटीएस) में फिटनेस जांच में पास होगा।
अभी तक निजी वाहनों को आरटीओ कार्यालय से ही फिटनेस प्रमाण-पत्र दिए जा रहे थे। व्यावसायिक वाहन के लिए यह व्यवस्था पहले से लागू है।
आरटीओ प्रशासन संदीप सैनी ने केंद्र सरकार के निर्देशों के क्रम में इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुसार, जिन क्षेत्रों में एटीएस सेंटर संचालित हो रहे, वहां 15 साल पुराने निजी वाहनों की फिटनेस जांच अब पारंपरिक मैनुअल व्यवस्था के बजाय पूरी तरह आटोमेटेड सिस्टम से कराई जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत 15 वर्ष पूरे कर चुके निजी वाहनों को री-रजिस्ट्रेशन से पहले फिटनेस टेस्ट अनिवार्य रूप से पास करना होगा। फिटनेस फेल होने की स्थिति में वाहन का पंजीकरण नवीनीकृत नहीं किया जाएगा। परिवहन विभाग का मानना है कि इससे सड़कों पर चल रहे जर्जर और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर अंकुश लगेगा।
परिवहन विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से फिटनेस जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व तकनीकी रूप से सटीक होगी। एटीएस पर वाहन के ब्रेक, सस्पेंशन, प्रदूषण स्तर, हेडलाइट एलाइनमेंट, हार्न, स्टीयरिंग समेत कई तकनीकी मानकों की कंप्यूटरीकृत जांच की जाएगी। इससे फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और फर्जीवाड़े पर भी रोक लगेगी।
केंद्र सरकार लंबे समय से पुराने वाहनों की वैज्ञानिक जांच और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जोर दे रही है। इसी क्रम में देशभर में चरणबद्ध तरीके से आटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था सड़क सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अहम कदम साबित होगी।



