MBBSAdmissionScam : MBBS दाखिला फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा
Exposure of forged certificates.
MBBSAdmissionScam : MBBS दाखिला फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा :- राज्य में फर्जी दस्तावेजों के जरिए एमबीबीएस कोर्स में दाखिला कराने वाले शातिर गिरोह के खिलाफ एसआईटी (SIT) की कार्रवाई लगातार जारी है। इसी क्रम में पुलिस ने तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने अपनी बेटियों के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए फर्जी कागजातों का सहारा लिया था। इस खुलासे से शिक्षा और चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है।
एसएसपी के निर्देश पर एसपी ग्रामीण-1 जया बलूनी के नेतृत्व में गठित एसआईटी इस हाई-प्रोफाइल मामले की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस ने जिन तीन नए आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें शामिल हैं: प्रवीण कुमार (निवासी, मुजफ्फरनगर), जगपाल सिंह (निवासी, हरिद्वार), रामपाल सिंह (निवासी, बिजनौर) इन तीनों पर आरोप है कि उन्होंने अपनी बेटियों (खुशी, स्वाति और तृप्ति) को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।
इस प्रकरण में अब तक कुल आठ आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने मेरठ में मिकोडो पाठशाला नाम से कंसल्टेंसी कंपनी चलाने वाले रूपेश पंडित से संपर्क साधा था। रूपेश निजी विश्वविद्यालयों और विदेशी संस्थानों में कमीशन पर एडमिशन दिलाने का काम करता था।
प्रवीण और जगपाल की संलिप्तता: प्रवीण कुमार ने अपनी बेटी खुशी और जगपाल सिंह ने अपनी बेटी स्वाति के दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था। इसके एवज में प्रवीण ने रूपेश को 25 लाख रुपये और जगपाल ने 30 लाख रुपये दिए थे। इन फर्जी दस्तावेजों के दम पर खुशी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला हुआ, जबकि स्वाति को नीट काउंसलिंग में बैठाया गया।
रामपाल सिंह का मामला: तीसरे आरोपी रामपाल सिंह ने अपने परिचित विशाल कुमार के साथ मिलकर बेटी तृप्ति के एमबीबीएस दाखिले के लिए कूटरचित दस्तावेज बनवाए। इन्हीं फर्जी कागजातों के आधार पर तृप्ति का दाखिला हरिद्वार स्थित जीएमसी (GMC) मेडिकल कॉलेज में कराया गया था।
फर्जी प्रमाणपत्रों का खुलासा
इसी साल 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेनटाउन थानों में सरकारी पोर्टल पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के संबंध में मुकदमें दर्ज किए गए थे।एसआईटी ने जब अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पतों का भौतिक सत्यापन किया, तो वे पूरी तरह फर्जी पाए गए।
इसके बाद पुलिस ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से प्रवेश से जुड़े तमाम दस्तावेज कब्जे में लेकर जांच शुरू की, जिससे अभ्यर्थियों के असली पतों और इस बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ।एसआईटी अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है, और साक्ष्यों के आधार पर आगे भी गिरफ्तारियां की जाएंगी।



