KedarnathDham : तीन दिन बाद फिर शुरू हुई केदारनाथ यात्रा, बाबा के जयकारों से गूंजा सोनप्रयाग
With bags on their shoulders and chants of 'Jai Baba Kedar' on their lips, the pilgrims undertook the arduous climb.
KedarnathDham : तीन दिन बाद फिर शुरू हुई केदारनाथ यात्रा, बाबा के जयकारों से गूंजा सोनप्रयाग :- पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण बाधित पड़ा केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग चौथे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए दोबारा खोल दिया गया है। मार्ग सुचारू होते ही सोनप्रयाग में पिछले तीन दिनों से रुके हजारों श्रद्धालुओं का इंतजार समाप्त हो गया और पूरा क्षेत्र ‘बम-बम भोले’ तथा ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
Kedarnath Yatra Update- तीन दिनों से यात्रा थमी होने के कारण सोनप्रयाग, गुप्तकाशी और आसपास के क्षेत्रों में हजारों की संख्या में श्रद्धालु जमा थे। मंगलवार सुबह मार्ग खुलते ही सोनप्रयाग में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। भीड़ के अत्यधिक दबाव को देखते हुए पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से श्रद्धालुओं को एक साथ भेजने के बजाय छोटे-छोटे जत्थों में चरणबद्ध तरीके से रवाना करना शुरू किया है।
कंधों पर बैग और जुबां पर बाबा केदार के जयकारे लिए श्रद्धालु कठिन चढ़ाई की परवाह किए बिना धाम की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हालांकि, चरणबद्ध निकासी के बावजूद सोनप्रयाग और गौरीकुंड में पंजीकरण और आगे बढ़ने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
मार्ग खोले जाने के बावजूद सुरक्षा चिंताओं पर बात करते हुए जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने यात्रियों से सावधानी बरतने की अपील की है।
आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया:“केदारनाथ पैदल मार्ग पर लगातार हुई बारिश के कारण कई संवेदनशील स्थानों पर अभी भी बोल्डर गिरने का खतरा बना हुआ है।
सुरक्षा बलों और आपदा प्रबंधन की टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है। मौसम और मार्ग की तात्कालिक स्थिति का आकलन करते हुए ही श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से आगे भेजा जा रहा है ताकि किसी भी तरह के जोखिम को टाला जा सके।”
एक तरफ जहां पैदल यात्रियों को धाम की ओर जाने की इजाजत मिलने से श्रद्धालुओं के चेहरों पर खुशी लौट आई है, वहीं दूसरी तरफ गौरीकुंड में घोड़ा-खच्चर संचालकों ने कड़ा विरोध जताया है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा कारणों से केवल पैदल श्रद्धालुओं को ही जाने की अनुमति दी गई है, जबकि घोड़ा-खच्चरों के संचालन पर फिलहाल रोक बरकरार रखी गई है।
इस निर्णय से आक्रोशित स्थानीय संचालकों का कहना है कि तीन दिनों से काम-काज पूरी तरह ठप था। अब मार्ग खुलने के बाद भी उन्हें संचालन की इजाजत न मिलने से उनके सामने रोजी-रोटी और पशुओं के चारे का संकट गहरा गया है। संचालकों ने प्रशासन से जल्द से जल्द घोड़ा-खच्चरों के संचालन की अनुमति देने की मांग की है।



