BollywoodMusicFacts : कौन हैं 1600 गानों में अपनी सीटी का जादू बिखेरने वाले नागेश सुर्वे? जानिए बॉलीवुड के इस गुमनाम हुनरमंद की कहानी
The melody of film songs like ‘Dil To Pagal Hai’ plays, or the playful whistling from ‘Chand Sifarish’ echoes.
BollywoodMusicFacts : कौन हैं 1600 गानों में सीटी का जादू बिखेरने वाले नागेश सुर्वे? जानिए बॉलीवुड के इस गुमनाम हुनरमंद की कहानी :- बॉलीवुड के कई ऐसे सुपरहिट गाने हैं जो अपने लिरिक्स और मेलोडी के लिए तो मशहूर हैं ही, लेकिन इन गानों में जान फूंक देती है एक खास सीटी, जो पूरे ट्रैक को अलग बना देती है. क्या कभी आपके मन में भी सवाल आता है कि आखिर इसे बजाता कौन है ? बॉलीवुड में कई ऐसे गाने हैं जिनकी शुरुआत या इंटरल्यूड में बजने वाली एक खास सीटी से हम उसे पहचान लेते हैं, क्योंकि ये सीटी सीधे दिल में उतर जाती है.
ये व्हिस्टलिंग कभी रोमांस को गहरा करती है तो कभी मस्ती भरे मूड का अहसास दिलाती है और कभी-कभी सस्पेंस को भी बढ़ाती है. दिलचस्प बात ये है कि हम गाने के राइटर, सिंगर, म्यूज़िक डायरेक्टर का नाम तो जानते हैं लेकिन वो सीटी बजाने वाला कौन था, इसका राज़ किसी को नहीं पता होता।
कई फिल्मी गानों जैसे ‘दिल तो पागल है’ की धुन बजती है या ‘चांद सिफारिश’ में मस्ती भरी सीटी गूंजती है, तो दिल अपने आप मुस्कुरा उठता है. दरअसल, ये कोई साउंड इफेक्ट नहीं बल्कि गाने की आत्मा है, और इसका श्रेय जाता है बॉलीवुड के मशहूर व्हिस्लर नागेश सुर्वे को…..नागेश सुर्वे साल 1977 से फिल्मी गानों में सीटी बजाते आ रहे हैं।
उन्होंने अभी तक 1600 गानों से भी ज्यादा में सीटी बजाई है. उनकी सीटी दिल को छू जाती है, ये काम कोई भी मशीन कर सकती. जहां प्लेबैक सिंगर्स को स्टारडम मिलता है, वहीं नागेश सुर्वे स्टूडियो के अंदर एक गाने की मिठास बनकर रुह तक उतर जाते हैं।
90 के दशक की रोमांटिक फिल्म Dil To Pagal Hai के गाने आज भी बड़े चाव से सुने जाते हैं. संगीतकार उत्तम सिंह की इस रचना में जो हल्की, दिल को छू लेने वाली सीटी सुनाई देती है, बस वही गाने में जादू कर जाती है।
बताया जाता है कि इस तरह की व्हिस्टलिंग रिकॉर्ड करने के लिए स्टूडियो में खास सेशन रखे जाते थे. नागेश सुर्वे जैसे कलाकार धुन को पहले समझते, फिर उसी मूड में सीटी रिकॉर्ड करते थे ताकि वो बस एक सुर होकर न रह जाए बल्कि भावना बनकर लोगों के भीतर तक उतर जाए।
नागेश सुर्वे की इस कला की शुरुआत बहुत दिलचस्प तरीके से स्टार्ट हुई. दरअसल, मुबंई के दादर में इनका बचपन बीता. नागेश मोहल्ले की लड़कों की अलग-अलग सीटी कॉपी करते थे. हर ग्रुप की एक खास सीटी होती थी. जिसे बजाकर एक-दूसरे ग्रुप को बुलाया जाता था. एक बार तो नागेश ने ट्रैफिक सिग्नेल को ही अपनी सीटी से कॉपी कर दिया।
लेकिन इस बार उन्हें डांट नहीं पड़ी बल्कि उनकी कला को सराहा गया.कहा जाता है कि एक बार नागेश पिकनेक के दौरान सीटी बजा रहे थे. एक म्यूजिक डायरेक्टर ने उनकी सीटी सुनकर कहा कि क्या तुम इसे किसी गाने में बजा सकते हो. नागेश ने कहा-हां, बस यहीं से उन्हें बॉलीवुड में ब्रेक मिला. फिल्म का नाम था Julie, मशहूर गाना था ‘Dil Kya Kare’. इसकी बाद उनकी सीटी का सफर ऐसा चला कि पीछे मुड़कर देखने की जरूरत मसहूस नहीं हुई।



