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UttarakhandNews : पहाड़ की महिलाओं के लिए सरकार का बड़ा कदम

If a pregnant woman has anemia (low blood count), high blood pressure, or any other serious medical condition...

UttarakhandNews : पहाड़ की महिलाओं के लिए सरकार का बड़ा कदम :-  उत्तराखंड के कई दूरस्थ पर्वतीय जिलों में आज भी ऐसे गांव हैं, जहां से मुख्य सड़क या अस्पताल तक पहुंचने में कई घंटे लग जाते हैं। आपातकालीन स्थिति में समय पर चिकित्सकीय सुविधाएं न मिलना जच्चा-बच्चा दोनों की जान के लिए बड़ा जोखिम खड़ा करता है।

इसी अंतर को पाटने के लिए ‘सुमन रोडमैप-2030’ के तहत राज्य के दुर्गम इलाकों में विशेष बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।

मिशन का मुख्य लक्ष्य: वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) को प्रति एक लाख जीवित जन्मों पर 70 से कम लाना और रोकी जा सकने वाली मातृ व नवजात मृत्यु दर को पूरी तरह शून्य के स्तर पर पहुंचाना है। योजना के तहत जोखिम वाली गर्भावस्था पर पैनी नजर रखने के लिए एक विशेष ‘फोर-स्टेज’ ट्रैकिंग सिस्टम बनाया गया है।

शुरुआती पहचान: यदि किसी गर्भवती महिला को एनीमिया (खून की कमी), हाई ब्लड प्रेशर या कोई अन्य गंभीर चिकित्सकीय समस्या है, तो शुरुआती जांच में ही उसकी पहचान कर ली जाएगी।

बाय-वीकली होम विजिट: गर्भावस्था के बेहद संवेदनशील आठवें और नौवें महीने में आशा कार्यकर्ता हर दो सप्ताह में अनिवार्य रूप से गर्भवती महिला के घर जाकर उसकी सेहत का हाल लेंगी।

पोषण और काउंसिलिंग: महिलाओं को प्रसव के लिए मानसिक रूप से तैयार करने, जन्म की तैयारियों और पोषण से जुड़ी विशेष सुविधाएं सीधे उनके घर के पास उपलब्ध कराई जाएंगी।

पहाड़ में सबसे बड़ी चुनौती प्रसव पीड़ा के दौरान महिला को सही समय पर अस्पताल पहुंचाना होता है। इस समस्या के समाधान के लिए रोडमैप के तहत दो बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:

मजबूत रेफरल नेटवर्क: एम्बुलेंस और आपातकालीन परिवहन व्यवस्था को जीपीएस-ट्रैकिंग और नेशनल इमरजेंसी नंबर (112) के साथ इस तरह इंटीग्रेटेड किया जा रहा है ताकि सुदूर गांवों से भी महिलाओं को बिना देरी बड़े स्वास्थ्य केंद्रों तक रेफर किया जा सके।

क्लाउड-बेस्ड ‘जननी पोर्टल’: पूरे राज्य में गर्भवती महिलाओं की सेहत की निगरानी के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग इस पोर्टल के जरिए रीयल-टाइम डेटा देख सकेगा कि किस क्षेत्र में किस तरह की मेडिकल सुविधाओं या डॉक्टरों की जरूरत है, ताकि कमियों को तुरंत दूर किया जा सके।

क्या बड़ा बदलाव आएगा?

अस्पताल तक पहुंच होगी बेहद आसान: सुधरे हुए एम्बुलेंस नेटवर्क से आपातकालीन स्थिति में बिना समय गंवाए तेज सहायता मिलेगी।
घर के पास मुस्तैद रहेगी टीम: आशा कार्यकर्ताओं और स्थानीय एएनएम के जरिए गांव के स्तर पर ही नियमित स्वास्थ्य निगरानी बढ़ जाएगी।
हाई-रिस्क मामलों में तुरंत एक्शन: जोखिम वाली गर्भावस्था की समय रहते पहचान होने से ऐन वक्त पर होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकेगा।
शिशु की बेहतर देखभाल: प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों को पोषण संबंधी सहायता और पूर्ण टीकाकरण की शत-प्रतिशत गारंटी मिलेगी।

Leena Kumari

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