NewLabourCodes : 2026 में कितना बदल जाएगा आपका Pay Slip
What and how much impact will the Code on Wages have on take-home salary?
NewLabourCodes : 2026 में कितना बदल जाएगा आपका Pay Slip :- कोड ऑन वेजेज में मुख्य बदलाव बेसिक सैलरी, डियरनेस अलाउंस (महंगाई भत्ता) और रिटेनिंग अलाउंस मिलाकर CTC का 50% या गवर्नमेंट नोटिफाई % होना चाहिए. कोड ऑन वेजेज में CTC फिक्स रहने पर डिडक्शंस बढ़ जाएंगे.नए लेबर कोड से सिर्फ उन एम्प्लॉयीज की टेक होम सैलरी पहले के मुकाबले कम होगी, जिनका PF डिक्शन मिनिमम वेज सीलिंग के बेसिस पर नहीं है।
सरकार ने 4 नए लेबर कोड लागू किए हैं. पहले जो 29 अलग-अलग श्रम कानून थे, उनमें से जरूरी बातें निकालकर 4 आसान कोड बना दिया गया है. इन नए कोड से अनौपचारिक सेक्टर, गिग वर्कर्स, प्रवासी मजदूरों और महिलाओं को बेहतर वेतन, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य-सुरक्षा की फुल गारंटी मिलेगी. 21 नवंबर 2025 से ये 4 नए कोड नोटिफाई हो चुके हैं।
ऐसे में साल 2026 में आपकी सैलरी स्ट्रक्चर पर इसका असर दिखेगा.आइए समझते हैं. ये 4 लेबर कोड कौन-कौन से हैं? नए कोड से आपकी टेक होम सैलरी, प्रॉविडेंट फंड, ग्रेज्युटी और ओवरटाइम पर कौन से नियम लागू होंगे? नए साल में आपके पे स्लिप में कौन से बदलाव देखने को मिलेंगे।
क्या हैं नए लेबर कोड्स? :- भारत में पहले 29 अलग-अलग लेबर लॉज थे. इन्हें लेकर लोगों में बहुत ज्यादा कंफ्यूजन था. इसलिए सहूलियत के लिए इन्हें 4 कोड्स में समेट दिया गया है. ये 4 कोड हैं-कोड ऑन वेजेज (2019), इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड (2020), कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी (2020) और OSHWC कोड (2020)।
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कोड ऑन वेजेज से टेक-होम सैलरी पर क्या और कितना असर?
कोड ऑन वेजेज में मुख्य बदलाव बेसिक सैलरी, डियरनेस अलाउंस (महंगाई भत्ता) और रिटेनिंग अलाउंस मिलाकर CTC का 50% या गवर्नमेंट नोटिफाई % होना चाहिए. कोड ऑन वेजेज में CTC फिक्स रहने पर डिडक्शंस बढ़ जाएंगे. हालांकि, सरकार ने साफ किया है सबकी टेक होम सैलरी में बदलाव नहीं होगा।
तो फिर किसकी टेक होम सैलरी कम या ज्यादा होगी?
नए लेबर कोड से सिर्फ उन एम्प्लॉयीज की टेक होम सैलरी पहले के मुकाबले कम होगी, जिनका PF डिक्शन मिनिमम वेज सीलिंग के बेसिस पर नहीं है. हालांकि, 15000 रुपये के ऊपर की बेसिक सैलरी होने पर PF कॉन्ट्रिब्यूशन बढ़ाना एम्प्लॉयी की मर्जी पर निर्भर करता है।
ग्रेच्युटी के नियम पर क्या असर होगा?
कोड ऑफ वेजेज के तहत अब ग्रेच्युटी कंट्रीब्यूशन भी बदल जाएगा. ग्रेच्युटी अब ‘वेजेज’ पर कैलकुलेट होगी, जिसमें बेसिक के अलावा अलाउंस (HRA और कन्वेयंस को छोड़कर) जुड़ेंगे. इससे ग्रेच्युटी अमाउंट बढ़ेगा. फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉई को अब सिर्फ 1 साल सर्विस के बाद ग्रेच्युटी मिलेगी, पहले 5 साल लगते थे. यूनिवर्सल मिनिमम वेजेज भी आएगा, जो लिविंग स्टैंडर्ड्स पर बेस्ड होगा. यह ऑर्गनाइज्ड और अन-ऑर्गनाइज्ड सेक्टर के सभी वर्कर्स को कवर करेगा।
PF रूल में क्या चेंजेस होंगे?
अब प्रॉविडेंट फंड (PF) 12% ‘वेजेज’ पर होगा, जो पहले सिर्फ बेसिक पर होता था. ग्रेच्युटी कैलकुलेशन भी वेजेज पर शिफ्ट हो गया है. गिग वर्कर्स (जैसे डिलीवरी बॉय) के लिए कंपनियों को 1-2% टर्नओवर पर कंट्रीब्यूशन देना होगा. लॉन्ग-टर्म में ये रिटायरमेंट सिक्योरिटी को स्ट्रॉन्ग बनाएगा, लेकिन कंपनियां अलाउंस घटाकर बैलेंस करने की कोशिश करेंगी।
ओवरटाइम पर सब कैटेगरी के एम्प्लॉयी को डबल पेमेंट मिलेगा?
नए लेबर कोड से करोड़ों मजदूरों और कर्मचारियों को फायदा होगा. लेकिन, ये अन-ऑर्गनाइज्ड सेक्टर के होने चाहिए. रूल के तहत अब एक दिन में 9 घंटे या हफ्ते में 48 घंटे से ज्यादा काम पर दोगुना रेट मिलेगा. पहले ये डबल नहीं था. ओवरटाइम सिर्फ इमरजेंसी में ही अनिवार्य होगा, जैसे फैक्ट्री में ब्रेकडाउन।
छुट्टियों पर कोई असर होगा?
अब हर 20 दिन काम करने पर 1 दिन की पेड लीव मिलेगी. नए कानून में वर्क-फ्रॉम-होम को भी शामिल किया गया है. फ्लेक्सिबल आवर्स के लिए म्यूचुअल एग्रीमेंट होगा. भविष्य में ये कोड्स अन-ऑर्गनाइज्ड सेक्टर को ज्यादा कवर करेंगे. इससे गिग वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी मिलेगी, जो इकोनॉमी को बूस्ट देगा।



