DrJaishankarPillai : फॉरेंसिक डेंटल डेटा बेस बनाकर डॉक्टर ने किया कमाल
Samples were collected from 23 states, and over 220,000 teeth were studied in depth.
DrJaishankarPillai : फॉरेंसिक डेंटल डेटा बेस बनाकर डॉक्टर ने किया कमाल :- अहमदाबाद के डेंटिस्ट डॉ. जयशंकर पी. पिल्लई ने 37,000 किमी यात्रा कर 23 राज्यों से 2.2 लाख दांतों का अध्ययन कर भारत का पहला फॉरेंसिक डेंटल डेटाबेस बनाया।
यह शोध हादसों और अपराधों में पहचान प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाएगा। दांतों को नेचुरल आईडी कार्ड मानते हुए भविष्य में AI से पहचान की क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है।
अहमदाबाद के डेंटिस्ट ने ऐसा काम कर दिखाया है, जो अब तक भारत में किसी ने व्यवस्थित तरीके से नहीं किया था। करीब पांच साल तक देश भर में उन्होंने 37,000 किलोमीटर की लंबी यात्रा की।
23 राज्यों से सैंपल जुटाए और 2.2 लाख से ज्यादा दांतों का गहराई से अध्ययन किया। उन्होंने भारत का पहला फॉरेंसिक डेंटल डेटाबेस तैयार कर दिया। यह पहल न सिर्फ विज्ञान के लिहाज से अहम है, बल्कि आम लोगों की जिंदगी से भी सीधे जुड़ी है। अब हादसों और अपराधों में पहचान की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और सटीक हो सकेगी।
गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से जुड़े डॉ. जयशंकर पी. पिल्लई, ने इस रिसर्च की शुरुआत एक बड़े सवाल से की थी कि क्या दांतों के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान, उसका क्षेत्र और उसकी पृष्ठभूमि समझी जा सकती है? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए उन्होंने 2020 से 2025 के बीच देशभर से सैंपल इकट्ठा किए और हर एक सैंपल को करीब 15 अलग-अलग पैरामीटर पर परखा। इस दौरान उन्होंने पाया कि भारत जैसे विविधता वाले देश में अलग-अलग इलाकों के लोगों के दांतों की बनावट में साफ अंतर देखने को मिलता है।
रिसर्च की सबसे खास बात यह है कि दांत शरीर का वह हिस्सा हैं, जो सबसे ज्यादा टिकाऊ होते हैं। कई बार आग, बाढ़, दुर्घटना या लंबे समय के बाद भी दांत सुरक्षित रहते हैं, जिससे मृतकों की पहचान करना संभव हो पाता है। यही वजह है कि फॉरेंसिक एक्सपर्ट दांतों को “नेचुरल आईडी कार्ड” मानते हैं।
डॉ. पिल्लई के अध्ययन ने इस दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया है, जिससे भविष्य में आपदाओं और अपराधों के मामलों में पहचान की प्रक्रिया तेज और ज्यादा विश्वसनीय बन सकेगी। अध्ययन के दौरान सामने आया कि दांतों के कुछ खास गुण, जैसे सामने के दांतों की बनावट, कैनाइन और मोलर में पाए जाने वाले विशेष पैटर्न, पहचान के लिए ज्यादा उपयोगी होते हैं।



