AntiAgingPill : चाइनीज गोली खाइये – 150 साल की उम्र पाइये
China's Longevity Pill has created a sensation around the world. How does Longevity Pills work?
AntiAgingPill : चाइनीज गोली खाइये – 150 साल की उम्र पाइये :- चीन की शेनझेन-आधारित कंपनी Lonvi Biosciences ने दावा किया है कि उसने ऐसी एंटी-एजिंग गोली विकसित की है जो “जॉम्बी सेल्स” को हटाकर इंसानी उम्र को काफी लंबे समय तक बढ़ा सकती है—संभावित रूप से 150 साल तक. कंपनी के CEO Ip Zhu के अनुसार, ये बूढ़ी कोशिकाएँ सूजन और बुढ़ापे के लक्षणों की वजह बनती हैं, और इन्हें निशाना बनाकर गोली उम्र बढ़ाने में मदद करती है।
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शेनझेन की Lonvi Biosciences कंपनी लंबे जीवन और बायोसाइंस तकनीक पर काम करती है। उनका दावा है कि उनकी एंटी-एजिंग गोली में मौजूद PCC1 (अंगूर के बीजों से निकला एक यौगिक) उम्र बढ़ाने में मदद कर सकता है। चूहों पर हुए परीक्षण में इसकी वजह से उनकी उम्र लगभग 9.4% बढ़ी और इलाज शुरू होने के बाद उनकी आयु क्षमता 64% तक बढ़ गई। कंपनी के CTO का कहना है कि 150 साल तक जीना आने वाले समय में बिल्कुल संभव हो सकता है।
कंपनी का कहना है कि उसने एक खास तरह की लोंगेविटी पिल बनाई है जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर शरीर के जीवनकाल को बढ़ा सकती है. यह दवा शरीर की उन पुरानी और निष्क्रिय हो चुकी कोशिकाओं को निशाना बनाती है जिन्हें वैज्ञानिक “जॉम्बी सेल” कहते हैं. ये कोशिकाएं खुद तो विभाजित नहीं होती लेकिन शरीर में लगातार सूजन और कई उम्र-संबंधी समस्याओं का कारण बनती रहती हैं. दुनिया भर में वैज्ञानिक ऐसी कोशिकाओं को बेअसर करने के तरीकों पर रिसर्च कर रहे हैं.इस दवा का मुख्य तत्व Procyanidin C1 (PCC1) बताया गया है जो अंगूर के बीजों से प्राप्त एक प्राकृतिक यौगिक है. कंपनी का दावा है कि लैब में किए गए माउस एक्सपेरिमेंट में इसके बेहद चौंकाने वाले नतीजे मिले हैं।
2024 में चीन की औसत उम्र 79 वर्ष तक पहुँच गई, जो दुनिया के औसत से काफी अधिक है। बढ़ती रुचि और नए शोध इसे और बढ़ा सकते हैं। शंघाई की लॉन्जेविटी फर्म TimePie के सह-संस्थापक गान यू के मुताबिक, पहले लंबी उम्र का विषय सिर्फ अमीर अमेरिकियों तक सीमित था, लेकिन अब चीन में आम लोग भी इसमें दिलचस्पी लेकर खर्च करने को तैयार हैं।
हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ये खोज अभी शुरुआती स्तर पर है और मनुष्यों पर इसके लंबे परीक्षण की जरूरत है। फिर भी वैज्ञानिक इसे एक नई उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं। ये रिपोर्ट मीडिया इनपुट्स पर आधारित है हम इसके तथ्यों की पुष्टि नहीं करते हैं।



