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MGNREGA : देशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का पूर्ण समर्थन – डॉ. जसविंदर सिंह
Dr. Gogi alleged that now Modi ji wants to make MNREGA a tool of centralized control.
MGNREGA : देशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का पूर्ण समर्थन :- कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने मोदी सरकार द्वारा मनरेगा को कमजोर करने की मंशा के खिलाफ कांग्रेस द्वारा घोषित देशव्यापी ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ का पूर्ण समर्थन करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल एक योजना की नहीं, बल्कि करोड़ों गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों के काम के अधिकार की रक्षा की लड़ाई है।
डॉ. गोगी ने कहा कि मनरेगा की बुनियाद तीन मूल सिद्धांतों पर रखी गई थी.
1.रोज़गार का अधिकार: जो भी व्यक्ति काम की मांग करे, उसे रोजगार देना सरकार की कानूनी जिम्मेदारी थी।
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2.गांवों की स्वायत्तता: गांव अपने विकास कार्यों का निर्णय स्वयं ग्राम सभा और पंचायतों के माध्यम से करते थे।
3.केंद्र सरकार की पूर्ण जिम्मेदारी: मजदूरी का पूरा भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाता था और सामग्री लागत का 75 प्रतिशत केंद्र वहन करता था।
उन्होंने कहा कि मनरेगा एक अधिकार आधारित कानून था, जिसने संकट के समय ग्रामीण भारत को संबल दिया, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा लाया गया वीबी–ग्राम–जी कानून मनरेगा को समाप्त करने की एक सोची-समझी साजिश है।
इस नए कानून के तहत रोजगार अब अधिकार नहीं रहेगा, बल्कि केंद्र सरकार की इच्छा पर निर्भर हो जाएगा, जिससे पंचायत व्यवस्था और 73वें संविधान संशोधन की भावना को गहरा आघात पहुंचेगा।
डॉ. गोगी ने आरोप लगाया कि अब मोदी जी मनरेगा को केंद्रीकृत नियंत्रण का औज़ार बनाना चाहते हैं—
1.बजट, योजनाएं और नियम सब कुछ दिल्ली से तय किए जाएंगे।
2.राज्यों पर 40 प्रतिशत तक का आर्थिक बोझ जबरन डाला जाएगा।
3.जैसे ही फंड खत्म होंगे या कटाई–बुआई के मौसम में, मजदूरों को महीनों तक रोजगार से वंचित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पंचायतों से निर्णय लेने का अधिकार छीनकर सब कुछ केंद्र में समेटा जा रहा है। इससे ग्राम सभाएं और पंचायतें केवल आदेश पालन करने वाली संस्थाएं बनकर रह जाएंगी और ठेकेदार प्रथा की पीछे के दरवाज़े से वापसी होगी। बायोमेट्रिक और जटिल प्रक्रियाओं के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद मजदूरों को रोजगार से बाहर करने की साजिश की जा रही है।
प्रदेश प्रवक्ता सुजाता पॉल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मजदूरी में अपना हिस्सा घटाकर राज्यों पर आर्थिक बोझ डालना संघीय ढांचे पर सीधा हमला है। राज्य सरकारों की सहमति के बिना वित्तीय जिम्मेदारी तय करना संविधान के अनुच्छेद 258 का उल्लंघन है, जिसे कांग्रेस न्यायालय में चुनौती देगी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह बदलाव मनरेगा की आत्मा पर सीधा हमला है और गरीब, मजदूर तथा ग्रामीण भारत के अधिकारों को छीनने की कोशिश है। कांग्रेस मनरेगा को कमजोर नहीं होने देगी। पार्टी की स्पष्ट मांग है कि वीबी–ग्राम–जी कानून को तत्काल वापस लिया जाए, मनरेगा को पुनः अधिकार आधारित कानून के रूप में बहाल किया जाए तथा पंचायतों और श्रमिकों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित किए जाएं।
डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने कहा कि देहरादून महानगर कांग्रेस इस आंदोलन में पूरी मजबूती से भाग लेगी और पंचायत से लेकर सड़क और सदन तक मनरेगा और गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।



